Prem Kavitayen
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दुख की बात है कि भारत में समकालीन साहित्य में प्रेम कविताएँ, लिखने की परंपरा धीरे-धीरे कम होती जा रही है। इसका परिणाम यह हो रहा है कि समाज में प्रेम और संवेदनशीलता प्रभावित होती जा रही है। जबकि विदेशों में प्रेम साहित्य की कोई कमी नहीं है, कई विदेशी लेखकों ने प्रेम साहित्य को एक नई दिशा दी है।
भारत में भी प्रेम साहित्य की एक समृद्ध परंपरा रही है। जयशंकर प्रसाद की “कामायनी” में प्रेम की गहराई और सुंदरता को दर्शाया गया है, सुमित्रानंदन पंत की “ग्रंथि” प्रेम की जटिलताओं को व्यक्त करती है, और महादेवी वर्मा की “नीरजा” प्रेम के दर्द को दर्शाती है। लेकिन आज प्रेम साहित्य की चिंताजनक कमी होती जा रही है। इस कमी को पूरा करने के लिए काव्य संग्रह प्रेम कविताएं पुस्तक को एक छोटा सा प्रयास समझिए ।
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