Sangeeta Govil

संगीता गोविल
माता : स्व. शशिप्रभा अग्रवाल
पिता : स्व. हीरा लाल अग्रवाल
पति : श्री प्रभात कुमार गोविल
सामाजिक सरोकारों और साहित्य साधना के प्रति समर्पित संगीता गोविल हिन्दी साहित्य की सक्रिय रचनाकार हैं। वे ‘सप्तरंग सेवा संस्थान’ का संचालन करते हुए ‘लेख्य-मंजूषा’ के माध्यम से हिन्दी भाषा के प्रचार-प्रसार एवं साहित्यिक गतिविधियों को निरंतर प्रोत्साहित कर रही हैं। इनकी लेखनी प्रमुख रूप से लघुकथा, कहानी, समी क्षा, कविता, लेख एवं आलेख पर चली है।
इनकी साहित्यिक यात्रा ‘साहित्यिक स्पंदन’ पत्रिका से आरम्भ हुई। इसके बाद उनकी रचनाएँ ‘संरचना’, ‘मुट्ठी में आकाश’, ‘सृष्टि’ सहित अनेक साझा संकलनों में प्रकाशित हुईं। अमृत राजस्थान, दैनिक जागरण तथा विभिन्न साहित्यिक पत्र-पत्रिकाओं और ब्लॉगों पर उनकी रचनाएँ निरंतर प्रकाशित होती रही हैं। आदरणीया मधुदीप जी की बहु चर्चित लघुकथा ‘नमिता सिंह’ पर कार्य करने का अवसर प्राप्त हुआ। वहीं आदरणीय बिजेंद्र जैमिनी के साहित्यिक ब्लॉगों पर भी इनकी सशक्त उपस्थिति रही है। लोकप्रिय संकलन ‘लघुकथा कलश’ के विभिन्न अंकों में इनकी रचनाएँ प्रकाशित हुई हैं। इसके अतिरिक्त भोपाल विश्वविद्यालय में लेखिका संघ द्वारा संचालित पाठ्यक्रम में उनकी पाँच लघुकथा का चयन उनकी साहित्यिक उपलब्धियों में एक पड़ाव है।
हिन्दी भाषा के संवर्धन, साहित्य – सृजन तथा आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों की शिक्षा को सहयोग देना उनके जीवन का प्रमुख उद्देश्य है। उनका विश्वास है कि साहित्य केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन का सशक्त आधार भी है।
माता : स्व. शशिप्रभा अग्रवाल
पिता : स्व. हीरा लाल अग्रवाल
पति : श्री प्रभात कुमार गोविल
सामाजिक सरोकारों और साहित्य साधना के प्रति समर्पित संगीता गोविल हिन्दी साहित्य की सक्रिय रचनाकार हैं। वे ‘सप्तरंग सेवा संस्थान’ का संचालन करते हुए ‘लेख्य-मंजूषा’ के माध्यम से हिन्दी भाषा के प्रचार-प्रसार एवं साहित्यिक गतिविधियों को निरंतर प्रोत्साहित कर रही हैं। इनकी लेखनी प्रमुख रूप से लघुकथा, कहानी, समी क्षा, कविता, लेख एवं आलेख पर चली है।
इनकी साहित्यिक यात्रा ‘साहित्यिक स्पंदन’ पत्रिका से आरम्भ हुई। इसके बाद उनकी रचनाएँ ‘संरचना’, ‘मुट्ठी में आकाश’, ‘सृष्टि’ सहित अनेक साझा संकलनों में प्रकाशित हुईं। अमृत राजस्थान, दैनिक जागरण तथा विभिन्न साहित्यिक पत्र-पत्रिकाओं और ब्लॉगों पर उनकी रचनाएँ निरंतर प्रकाशित होती रही हैं। आदरणीया मधुदीप जी की बहु चर्चित लघुकथा ‘नमिता सिंह’ पर कार्य करने का अवसर प्राप्त हुआ। वहीं आदरणीय बिजेंद्र जैमिनी के साहित्यिक ब्लॉगों पर भी इनकी सशक्त उपस्थिति रही है। लोकप्रिय संकलन ‘लघुकथा कलश’ के विभिन्न अंकों में इनकी रचनाएँ प्रकाशित हुई हैं। इसके अतिरिक्त भोपाल विश्वविद्यालय में लेखिका संघ द्वारा संचालित पाठ्यक्रम में उनकी पाँच लघुकथा का चयन उनकी साहित्यिक उपलब्धियों में एक पड़ाव है।
हिन्दी भाषा के संवर्धन, साहित्य – सृजन तथा आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों की शिक्षा को सहयोग देना उनके जीवन का प्रमुख उद्देश्य है। उनका विश्वास है कि साहित्य केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन का सशक्त आधार भी है।
Showing the single result

