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Ratnakar Shashtri

लेखक का संक्षिप्त परिचय
लेखक स्वतंत्रता सेनानी रत्नाकर शास्त्री का जन्म विक्रमी संवत 1979 (सन 1922 ई.) को श्रावण पूर्णिमा रक्षाबंधन के पावन पर्व पर मेरठ जिले की सरधना तहसील के गांव पल्हैडा में एक साधारण कृषक, राजपूत चौहान परिवार में तोताराम के यहां हुआ। गुरुकुल डोरली, और वेद विद्यालय दिल्ली से आयुर्वेद की शिक्षा प्राप्त की। उस समय भारत स्वतंत्रता की प्रसव वेदना से गुजर रहा था। तभी अंग्रेजों की शह पर दक्षिण भारत की तत्कालीन हैदराबाद रियासत के मुस्लिम निजाम ने वहां पर हिंदुओं का दमन करना शुरू कर दिया। उनके धार्मिक क्रियाकलापों पर रोक लगा दी गयी। मंदिरों में ताले डाल दिए गए े उस समय की प्रबल हिन्दू वादी सामाजिक संस्था ‘आर्य समाज’ और उसके सहयोग में ‘हिन्दू महा सभा’ ने इसका राष्ट्रव्यापी तीव्र विरोध किया। समस्त भारत से सत्याग्रही भेजकर हैदराबाद में हिंदू धार्मिक क्रियाकलाप बहाली को लेकर आन्दोलन कर गिरफ्तारी देना प्रारंभ कर दिया। यह हिंदू वादी आंदोलन है, ऐसा कह कांग्रेस और गाँधी ने इसमें साथ नहीं दिया। उल्टे आन्दोलन का विरोध किया। हिन्दुओं के तीव्र विरोध के चलते निजाम को झुकना पड़ा। और हिन्दू धार्मिक कृत्य पुन: बहाल हए। इस आन्दोलन में लेखक भी मार्च 1939 ई. में गुरुकुल डोरली की ओर से साथियों सहित हैदराबाद जेल गए। 2 वर्ष की सजा हुई। बाद में सभी को समयपूर्व ससम्मान रिहा कर दिया गया। भारत सरकार ने इन आन्दोलनकारियों को भी स्वतंत्रता सेनानी मानकर सरकारी सुविधा, पेंशन, स्वतंत्रता सेनानी प्रमाणपत्र सम्मान स्वरूप प्रदान किये। 22 नवम्बर 1994 ई. को आप अपने पीछे भरा पूरा परिवार और एक अपार बौद्धिक सम्पदा छोड़कर परलोक गमन कर गए।
आप आयुवेर्दाचय, वैद्य विशारद और रामायण (वाल्मीकि) के प्रकांड विद्वान थे। पारिवारिक परिस्थितियों के चलते विधिवत चिकित्सा कार्य न कर सके। परन्तु मरते दमतक निर्धन लोगों की सेवा स्वरूप चिकित्सा करते रहे। आप मूर्धन्य रामायण मर्मज्य थे। रामायण पर बहुत शोध किया। उस पर बहुत लिखा। रामायण के बालकाण्ड में ग्रहों की स्थिति के अनुसार ‘राम जन्म काल निकला’, रामायण से राम के मानव रूप को उकेरते हुए तुलसी के विष्णु भगवन के अवतार से इतर ‘राम भगवन क्यों ?’ लिखा। रामायण से ही एक अनाम, अज्ञात परन्तु महत्वपूर्ण पात्र पर ‘हेमा’ उपन्यास लिखा। जिसकी कथा मेरठ से मयराष्ट्र होते हुए महाराष्ट्र से परे जाकर समाप्त होता है। मंदोदरी का पीहर, मय दन्त का खेडा, रावण की ससुराल आदि प्रश्नों का स्पष्ट उत्तर हेमा में है। ‘राम कथा इतिहास के दर्पण में’ आदि सब रामायण के शोध पर आधारित है। इनमे से कुछ प्रकाशित हैं कुछ प्रकाशनाधीन हैं।
उनकी प्रसिद्द रचनाएँ – वेद और विज्ञान, राम का जन्म काल, गुलामी के यातना भरे गीत, जेल डायरी, स्वराज, युग – मन्वंतर विमर्श, राम कथा इतिहास के आईने में हैं। ‘राम भगवान क्यों ?’, ‘जेल की सलाखों से’ प्रकाशनाधीन हैं। ‘हेमा’ आपके हाथ में है।

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