| Sign In Account

Harender Nath Shrivastava

हरेंद्र ‘हमदम’ दिलदारनगरी
पिता का नाम श्री कामता प्रसाद
माता का नाम – श्रीमती बसंती देवी
शिक्षा- स्नातकोत्तर (प्रथम) जंतु विज्ञान, एम बी ए, सीएआईआईबी, ज्योतिष और वास्तु में डिप्लोमा।
अभिरुचि- कविता, गीत, गÞजÞल एवं अन्य विधाओं में लेखन। नये विषय पढ़ने में रुचि, संगीत और नये स्थानों की सम्प्रति
सम्प्रति- सेवानिवृत्त, नियमित लेखन, अध्ययन, सामाजिक कार्य इत्यादि। अभी बंगलौर में रहते हैं परंतु वाराणसी के मूल निवासी हैं और ग्रेटर नोएडा (वेस्ट) में ज्यादातर समय रहते हैं।
इनको अपने लगभग 39 वर्षों की सेवा काल भारत के सभी दिशाओं (उत्तर, पश्चिम, पूरब दक्षिण सिर्फÞ पूर्वोत्तर छोड़कर) जाने का, कार्य करने का अनुभव है। सभी प्रदेशों के, क्षेत्रों के व्यक्तियों का संपर्क मिला, वहाँ की संस्कृति और परंपरा का ज्ञान हुआ। और सबसे अधिक, लोगों की मन की संवेदनाएँ, भावनायें, परस्पर संबंध, अनुभूतियाँ, आशा, निराशा, भूख, गरीबी, अमीरी, प्रेम, घृणा, भाईचारा, मानवता आदि गुणों का साक्षात जानने का अवसर इन्हें मिला। सबसे अधिक जो इनकी संवेदना ने ग्रहण किया, वो मानव मन की जिजीविषा, जब तक साँस तब तक करते रहने की अधीर मानव क्षमता, का आभाष हुआ। ये सब इनकी अमूल्य धरोहर हैं, जो समय समय पर इनकी रचनाओं में परिलक्षित होती है।
प्रकाशित कृतियाँ – निम्न काव्य संकलन वर्ष 2000 से आज तक प्रकाशित-
1 कलम हमने उठाई है
2 ‘नहीं पीर परायी है’ इसकी प्रस्तावना प्रसिद्ध साहित्यकार, साहित्य पीठ पुरस्कार विजेता
डॉ दामोदर खड़से जी ने लिखी है।
3 तलाश रोशनी की (2, 3 और 4) दोनों पुस्तकें इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर भी उपलब्ध हैं।
4 कितनी बार कहा साथी (पातियाँ प्यार की)
5 कुछ मन की कहूँ  (वर्तमान संकलन)
साझा संग्रह -( प्रकाशित और प्रक्रिया में)
‘कलम के सिपाही’, ‘चाँद के पार चलो’, ‘गाओ हिन्दी गान’, ‘प्रेम पुष्प’, ‘दिव्या’, ‘रूह तक’, ‘निर्भया’, ‘मैं भी दीपक हूँ’, ‘सुनो बिभाकर’, ‘मेरे प्यार में तुम’, ‘लम्हे’, ‘लौटती लहरों की बांसुरी’, ‘अवध में राम आये हैं’ ‘और’, ‘मन की बातें’, ‘कल्पित काव्य’, ‘हृदय स्वर’, ‘दिया प्रीत’, ‘काव्य माधुरी’, ‘काव्य मंजरी’, ‘काव्य वर्तिका’, ‘काव्य कुंभ’, ‘काव्य प्रवाह’, ‘काव्य उपवन’, ‘हिन्दी की शान’, ‘आवरगी’ और ‘शब्द सैनिक’ आदि में भी मेरी रचनाएँ सम्मिलित हुई है। इसके अतिरिक्त दो साझा संकलन ‘काव्य मंजरी’ (रवीना प्रकाशन) और ‘मन की उमंग’( इंकलाब प्रकाशन) में संपादक पद से भी निरूपित किया गया है, जो शीघ्र प्रकाश्य हैं

Coming Soon