Dr. Raj Kumar Sen Raj

डॉ. राज कुमार सेन ‘राज’ (डॉ॰ राज K राज)
जन्म – गाँव- ब्राह्मणों की सरेरी, तहसील- आसीन्द,
जिला- भीलवाड़ा (राज.)
पिता – नाथू लाल जी सेन
माता – जमना देवी
भ्राता श्री – किशोर कुमार जी, अशोक कुमार जी
अनुज- दिनेश
पत्नी – लीला
पुत्र- आदित्य राज
शिक्षा – शिक्षा में स्नातक और स्नातकोत्तर के साथ ही चार भाषाओं में स्नातकोत्तर की उपाधि ।
हिन्दी में नेट और भक्तिकाल के निर्गुण भक्ति धारा के प्रसिद्ध सबसे अधिक पढे लिखे, श्रृंगार के घोर विरोधी संत सुन्दर दास जी पर केन्द्रित संत काव्य परम्परा विषय में महर्षि दयानन्द सरस्वती विश्वविद्यालय से पीएचडी की उपाधि।
कार्य – कैंची, कलम और केमराकार
सम्प्रति- सहायक आचार्य (नामधारी)
हिन्दी ( कन्या महाविद्यालय – गंगापुर ) गत सोलह वर्षों से महाविद्यालय में हिन्दी भाषा की सेवा कर रहे हैं।
प्रेरक वक्ता, शोध पर्यवेक्षक, एवं ‘सुन्दर विचार’ मासिक पत्रिका के सम्पादक।
राजयोग साधना के प्रभाव से समृद्ध उनका लेखन सदैव मनुष्य के आन्तरिक परिवर्तन की ओर संकेत करता है।
इनके लेख, कविताएँ, कहानियाँ और शोध आलेख विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं।
‘एक राजयोगी की आत्मकथा’ उनकी आध्यात्मिक यात्रा का सच्चा प्रतिबिम्ब है — जहाँ शब्द केवल कथन नहीं, साधना बन जाते हैं।
घुमक्कड़ और वैरागी प्रवृत्ति। दार्शनिक या आध्यात्मिक विषयों पर सतत नित्य लेखन।
‘राज खुश रहने के ‘ नाम में स्तम्भ लेखन जिसका प्रत्येक मुक्तक इस सांसारिक बन्धनों से मुक्त करने में सफल हो सकता है।
ई मेल – kavirajsen@gmail.com
चलभाष सम्पर्क सूत्र – 9829411519
जन्म – गाँव- ब्राह्मणों की सरेरी, तहसील- आसीन्द,
जिला- भीलवाड़ा (राज.)
पिता – नाथू लाल जी सेन
माता – जमना देवी
भ्राता श्री – किशोर कुमार जी, अशोक कुमार जी
अनुज- दिनेश
पत्नी – लीला
पुत्र- आदित्य राज
शिक्षा – शिक्षा में स्नातक और स्नातकोत्तर के साथ ही चार भाषाओं में स्नातकोत्तर की उपाधि ।
हिन्दी में नेट और भक्तिकाल के निर्गुण भक्ति धारा के प्रसिद्ध सबसे अधिक पढे लिखे, श्रृंगार के घोर विरोधी संत सुन्दर दास जी पर केन्द्रित संत काव्य परम्परा विषय में महर्षि दयानन्द सरस्वती विश्वविद्यालय से पीएचडी की उपाधि।
कार्य – कैंची, कलम और केमराकार
सम्प्रति- सहायक आचार्य (नामधारी)
हिन्दी ( कन्या महाविद्यालय – गंगापुर ) गत सोलह वर्षों से महाविद्यालय में हिन्दी भाषा की सेवा कर रहे हैं।
प्रेरक वक्ता, शोध पर्यवेक्षक, एवं ‘सुन्दर विचार’ मासिक पत्रिका के सम्पादक।
राजयोग साधना के प्रभाव से समृद्ध उनका लेखन सदैव मनुष्य के आन्तरिक परिवर्तन की ओर संकेत करता है।
इनके लेख, कविताएँ, कहानियाँ और शोध आलेख विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं।
‘एक राजयोगी की आत्मकथा’ उनकी आध्यात्मिक यात्रा का सच्चा प्रतिबिम्ब है — जहाँ शब्द केवल कथन नहीं, साधना बन जाते हैं।
घुमक्कड़ और वैरागी प्रवृत्ति। दार्शनिक या आध्यात्मिक विषयों पर सतत नित्य लेखन।
‘राज खुश रहने के ‘ नाम में स्तम्भ लेखन जिसका प्रत्येक मुक्तक इस सांसारिक बन्धनों से मुक्त करने में सफल हो सकता है।
ई मेल – kavirajsen@gmail.com
चलभाष सम्पर्क सूत्र – 9829411519
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