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Basant Sharma

आत्म कथ्य
मित्रों मैं मूलत: रोहतक हरियाणा का निवासी हूँ, मेरा जन्म भी हरियाणा के भिवानी शहर में बसंत पंचमी के दिन हुआ था। इसलिए मेरा नाम बसंत रखा गया। मेरी प्राथमिक से ग्रेजुएशन तक की सारी शिक्षा मोदीनगर में ही हुई। बचपन से लेखन का शौक़ था अध्ययन के साथ-साथ मुझे कहानी लिखने का भी शौक़ रहा व जिला स्तर के कई पुरस्कार भी जीते। फिर कई वर्ष अमर उजाला के साथ पत्रकारिता में भी जुड़ा रहा, लगभग 20 वर्ष रामलीलाओं में मंचन भी किया। इसी वजह से पब्लिक के मध्य बोलने की झिझक खुल गई। मेरे पड़ोसी बड़े भाई स्वर्गीय मथुरा प्रसाद दीक्षित जी के साथ उनके सानिध्य में रामायण के पाठ पर सुंदरकांड घर-घर जाकर किया। इस अवसर पर कवि सम्मेलनों इत्यादि में जाता रहा। बस भावनाओं के साथ उड़कर लिखने का हल्का सा हुनर सीख लिया।
देश से ज्यादा राजनीति हमारे काव्य मंचों पर भी प्रभावित है। सभी को नहीं कह सकता, बहुत से लोग व्यावसायिक हैं। मेरे बच्चों ने भी मेरे इस हुनर में मेरा बहुत सहयोग दिया है। साधना चैनल के निदेशक, श्री प्रवीण आर्य जी ने भी मेरे इस शौक़ में सहयोग दिया। आज (13 मार्च 2024) जिस दिन मैं पुस्तक का लोकार्पण कर रहा हूँ, आज मेरे विवाह की 50वीं वर्षगाँठ है, अर्थात गोल्डन जुबली है। मेरी जीवन साथी कृष्णा शर्मा ने इस सफÞर में मेरा हाथ पकड़े रखा और मुझे इस स्थिति तक पहुँचाया। मैं थोड़ा परेशानियों में जल्दी घबरा जाता हूँ, मेरी पत्नी ने मुझे साहस देकर सफल बनाए रखा। यह मेरा परम सौभाग्य है कि मैं अपने बच्चों पर गर्व कर सकता हूँ। जो कभी मेरे लिए बोझ नहीं बने। ससुराल में रहते हुए भी बच्चे मेरा धीरज बनाए रखते हैं। मुझे मेरे मित्र भी मेरे शौक़ से जुड़े मिले। मैं पत्रकारिता के अतिरिक्त मोदीनगर में एक संस्था स्वामी कल्याण देव वृद्धआश्रम ट्रस्ट से जुड़ा हूँ। उन लोगों ने मुझे अध्यक्ष पद दे रखा है। वरिष्ठ नागरिक संगठन से जुड़ी बहुत सी गतिविधियों में जुड़ा रहता हूँ। हमारी संस्था गÞरीब परिवारों के विवाह का आयोजन भी करती है। ठाकुर जी के भजन लिखने का भी शौक़ है। दो पुस्तक भी लिखी हैं, जो प्रकाशन की प्रतीक्षा में हैं। मेरे अनुज मास्टर धर्मेंद्र शर्मा, रूपचंद शर्मा व सत्यनारायण शर्मा और रामवीर जी का गत कई वर्षों से सहयोग रहा है। ब्राह्मण सभा ने भी उपाध्यक्ष के पद से मुझे जोड़ रखा है। हमारे कई मित्रों की एक संस्था साहित्य साधना मंच रजिस्टर्ड में भी हम नई प्रतिभाओं का चयन कर, उन्हें प्रोत्साहित करते हैं। पुन: मैं मेरे सभी साथी सहयोगी गुरुजनों आदि इत्यादि का मन से धन्यवाद करता हूँ आज अचानक लिखना पड़ा जो मेरे मन में आया कहा, कोई अन्यथा ना ले।
आपका स्नेही ।
-बसन्त शर्मा

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